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Thursday, February 20, 2020
Saturday, December 1, 2012
आधुनिक देश प्रेम
देश छोड़ अंग्रेज़ गए, बदली नारों की भाषा,
समय हैं बदला, साथ में बदली देश प्रेम की परिभाषा,
ड्राइंग रूम में बैठ के जब भी, खाया गरम समोसा है.
और देख कर टी.वी. बात-बात पर नेताओं को कोसा हैं,
वहीँ काश्मीर, वहीँ घोटाले, ये समाचार नए थे क्या,
नेता तो हम खुद चुनते हैं, वोट डालने गए थे क्या,
प्रदुषण से भरे शहर में तुमने बच्चे पाले हैं,
समय हैं बदला, साथ में बदली देश प्रेम की परिभाषा,
ड्राइंग रूम में बैठ के जब भी, खाया गरम समोसा है.
और देख कर टी.वी. बात-बात पर नेताओं को कोसा हैं,
वहीँ काश्मीर, वहीँ घोटाले, ये समाचार नए थे क्या,
नेता तो हम खुद चुनते हैं, वोट डालने गए थे क्या,
प्रदुषण से भरे शहर में तुमने बच्चे पाले हैं,
पेड़ लगाया तुमने कोई, क्यों सबके मुंह पर ताले हैं,
पेड़ लगाना क्या केवल सरकारी जिम्मेदारी हों,
हरियाली के महायज्ञ में, सबकी भागीदारी हो,
जनसंख्या विस्फोट देश की सबसे बड़ी परेशानी,
संसाधन कम पड़ने पर, क्यूँ करती जनता हैरानी,
परिवार नियोजन के नारे की, मिलकर बोलो जय-जयकार,
एक हो प्यारा घर में बच्चा, पेड़ लगे हो एक हजार,
अनपढ़ता के अंधियारे को, मिल कर हमें भगाना हैं,
आस-पास किसी अनपढ़ को, पढने को उकसाना हैं,
कलम हाथ में उसे थमा कर, थोडा-थोडा उसे पढ़ाते जाओ,
अपने ज्ञान के बड़े बल्ब से, उसका दिया जलाते जाओ,
घर में व्यर्थ जले ने बिजली, आओ ऐसा प्रबंध करे,
बच्चे बूढ़े आदत डाले, बहते नल को बंद करे,
ऑफिस का काम करो मन से, न टालो जब तक टलता है.
याद रहे की इसी काम से, घर का चूल्हा जलता हैं,
आज देश को नहीं जरुरत, फांसी पर चढ़ जाने की,
देश भक्ति की यहीं हैं सूरत, नए ज़माने की,
अधिकार और कर्तव्य का ज्ञान हो सबको, न कोई कमजोर और बेचारा हो -2
पेड़ लगाना क्या केवल सरकारी जिम्मेदारी हों,
हरियाली के महायज्ञ में, सबकी भागीदारी हो,
जनसंख्या विस्फोट देश की सबसे बड़ी परेशानी,
संसाधन कम पड़ने पर, क्यूँ करती जनता हैरानी,
परिवार नियोजन के नारे की, मिलकर बोलो जय-जयकार,
एक हो प्यारा घर में बच्चा, पेड़ लगे हो एक हजार,
अनपढ़ता के अंधियारे को, मिल कर हमें भगाना हैं,
आस-पास किसी अनपढ़ को, पढने को उकसाना हैं,
कलम हाथ में उसे थमा कर, थोडा-थोडा उसे पढ़ाते जाओ,
अपने ज्ञान के बड़े बल्ब से, उसका दिया जलाते जाओ,
घर में व्यर्थ जले ने बिजली, आओ ऐसा प्रबंध करे,
बच्चे बूढ़े आदत डाले, बहते नल को बंद करे,
ऑफिस का काम करो मन से, न टालो जब तक टलता है.
याद रहे की इसी काम से, घर का चूल्हा जलता हैं,
आज देश को नहीं जरुरत, फांसी पर चढ़ जाने की,
देश भक्ति की यहीं हैं सूरत, नए ज़माने की,
अधिकार और कर्तव्य का ज्ञान हो सबको, न कोई कमजोर और बेचारा हो -2
जनहित में जब कदम बढे तो, पहला कदम हमारा हो।- 3
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